महाराष्ट्र सरकार ने बांग्लादेशियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। राज्य में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों द्वारा बनवाए गए फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों को 15 अगस्त तक रद्द करने का आदेश दिया गया है। सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया है, जो राज्य में ऐसे नागरिकों की पहचान करेगी।
मुंबई : महाराष्ट्र में बांग्लादेशियों के खिलाफ एक्शन तेज हो गया है। महाराष्ट्र में जिन लोगों ने फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट बनाए हैं उन्हें रद्द करने का आदेश राज्य सरकार ने दिया है। इसे लेकर महाराष्ट्र सरकार में मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बुधवार को कहा कि महाराष्ट्र में अवैध तरीके से रह रहे बांग्लादेशियों की जांच के लिए सरकार ने एक टास्क फोर्स बनाया है।
महाराष्ट्र में बनाई ग यह टास्क फोर्स जांच करेगी कि राज्य में ऐसे कितने बांग्लादेशी नागरिक हैं, जिन्होंने फर्जी सर्टिफिकेट बनवाए हैं। जितने भी बर्थ सर्टिफिकेट फर्जी तरीके से बनाए गए हैं, उन्हें रद्द करने का आदेश दिया गया है। सरकार ने 15 अगस्त तक पूरी कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
15 अगस्त तक पूरा हो जाएगा प्रॉसेस
महाराष्ट्र सरकार बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी जन्म प्रमाणपत्र रद्द करेगी। राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बुधवार को यह घोषणा की। उन्होंने बताया कि सरकार 15 अगस्त तक ऐसे 42,000 से ज्यादा फर्जी प्रमाणपत्र रद्द कर देगी। यह संख्या और भी बढ़ सकती है, क्योंकि अभी जांच जारी है। राजस्व और स्वास्थ्य विभागों को इस मामले पर मिलकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
किरीट सोमैया ने उठाया था मामला
मामला इस साल की शुरुआत में सुर्खियों में आया। बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने आरोप लगाया कि 3997 जन्म प्रमाणपत्र जाली दस्तावेजों का जरिए बनवाए गए हैं। ये फर्जी प्रमाणपत्र बांग्लादेशी नागरिकों को जारी किए गए। किरीट सोमैया ने इसके दस्तावेज भी दिखाए। उनके आरोप के बाद मालेगांव में तैनात दो अधिकारियों को सस्पेंड किया गया।
योगेश कदम ने जारी किए थे आंकड़े
मार्च में महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने विधानसभा को बताया कि पिछले चार वर्षों में अवैध आप्रवासियों पर नकेल कसी गई है। उन्होंने सरकारी आंकड़े भी दिखाए। बताया कि 2021 में 109 बांग्लादेशियों को वापस भेजा गया। 2022 में 77, 2023 में 127 और 2024 में अब तक 716 गिरफ्तारियां और 202 निर्वासन हुए हैं।